Friday, December 26, 2014

काश मेरे लाडले -Poetry on Peshawar attack

काश मेरे लाडले ,तूने पेट दर्द का बहाना किया होता।
तो आज मेरी कोक सुनीकर, तू नहीं गया होता
शायद मेरे बुढ़ापे का सहारा, न छिनता
शायद यह घर, सुना सुना नहीं लागता।

तेरी इतनी दर्दनाक मौत की जिमेदार, शायद में हूँ
क्यूँ जन्म दिया तुझे जहाँ जहाँ मनुष्य रूपी शैतान रहते है
जहाँ हैवान, ईश्वर को मारने का कलेजा रखते है
जहाँ इंसान इंसान का, दुश्मन है
जहाँ की सत्ता ,मानवता से बलवान है
जहाँ का मानव, दनाव से भी ज्यादा दुष्ट है

मुस्लिम हिन्दू सिख ईसाई सब तो तुझे अल्लाह ,भगवान, सत्गुरु ,jesus का रूप मानते है
फिर क्यों, दानव दरिंदो ने आपने खुदा को मर दिया

क्यों तू आज स्कूल छोड़कर, ईमली तोड़ने नहीं गया
क्यों तू आज स्कूल की बस, समय पर पकड़ लिया

बेटा तेरे दर्द को मैंने पुरे विश्व की आँखो में देखा है
तेरे बहते खून को देख पूरी दुनिया की आँखे नम हुई होगी

तू चला तो गया है आपने साथियो के साथ जन्नत में
पर वहा मस्ती मत करना क्योंकि तेरी माँ तुझे वहा बच्चने नहीं आयेगी

 बेटा अफ़सोस न करना आपने जीवन के जाने का,
यहा अभी भी कुछ सियासी लोग तेरे दर्द को सुनकर अनजान बनते है।

बेटा मेरी यादो में हमेशा तू जिन्दा रहेगा ,
और मुझे यकीन है, तू जन्नत में भी मज़्ज़ा कर रहा होगा ।