Wednesday, September 30, 2015

यह दिल

यह दिल 

नासमझ बेसहारा  असहाए  यह दिल
कभी  नरम तो कभी बेचैन  यह दिल !

सात सुरों में कितने अलग-अलग भावनाओं में इस्तेमाल हुआ यह दिल,
रंगीन परदे पर कितनी सारी कहानिया सुनाता रहता है यह दिल
दो अजनबियों  में मोहोब्बत जगाता है यह दिल
दो लोगो को जोड़े लगता है यह दिल
सवाल या निशान खड़ा करता है यह दिल
जज़्बात नए पैदा करता है यह दिल

मांगने पर कुछ मिल जाता, तो लगता है बहुत बड़ा है यह दिल
मांगने पर कुछ न मिलता तो छोटा सा लगता है यह दिल


जब इतना सब कुछ
जब इतना सब कुछ हो सकता है इस दिल से
तो क्यों दोहरे से मौत करता है यह दिल
क्यों टूथ जाता है यह दिल
क्यों जखम बन जाता है यह दिल
क्यों रुलाता है यह दिल
क्यों किसी की याद दिलाता है यह  दिल !


अभी यह दिल टूटा सा  लगने लगता है
कभी बिखरा नज़र आता है
कभी ओस की तरह बिना बौछार नरम हो जाता है
कभी रुला देता है यह दिल !