Saturday, December 13, 2014

मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

यह कविता उस बेकसूर लड़की जो सजा कट रही है किसी ओर के अमानवीय व्यवहार के कारण।

 #RAPE VICTIM

 मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो
 मुझे अब यह समाज से नफरत है
इंसाफ की रुह दहलाने वाली इमारत से नफरत है

मुझे इस पूरी दुनिया से नफरत है
 इसलिए नही की मेरे साथ गलत हुआ
बल्कि इसलिए की अब उसे कुरेदा जा रहा है
मुझे कुछ नही कहना,न बताना अपना दर्द

 मुझे आपने दर्द को स्वयं सेहने दो|
 मत उछालो मेरी आबरू, बिकाऊ दुनिया में
मत दो मुझे हमदर्दी ,मेरा हमदर्द मे ही हूँ

 अब न बोलो मुझे बेच्चरी ,बेसहारा, लाचार
 कोशिश हो साके तो भूल वो घटना
जहा मेरी सिसकियो को सुनकर कुछ लोग चले गए थे

 वो घटना जिसका चलचित्र दूरदर्शन पर दिखते हो
मेरे बदले हुआ नाम से मेरी कहानी सुनाते हो
क्यों जलाने जाते हो मेरे नाम की मोमबतिया
क्यों उस घटना का सहारा लेकर महिलाओ को बाहर जाने से रोकते हो।

 झिझोर जाती है मेरी आत्मा जब दूरदशन पर पापा रो पढ़ते है।
 जब मेरी माँ की चमकती आँखे धुँधली दिखाई देती है
जब गुड़िया स्कूल नही जाती है।
जब मेरे दोस्त मेरे सामने अपना प्रश्नवाचक चेहरा लेकर आते है।

 हो सके तो समाज के आईने को बदलो
 हो सके तो अपनी सोच बदलो
ओर मेरे लिए बस इतना कर दो मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

 ~कुश गुप्ता