Wednesday, September 30, 2015

यह दिल

यह दिल 

नासमझ बेसहारा  असहाए  यह दिल
कभी  नरम तो कभी बेचैन  यह दिल !

सात सुरों में कितने अलग-अलग भावनाओं में इस्तेमाल हुआ यह दिल,
रंगीन परदे पर कितनी सारी कहानिया सुनाता रहता है यह दिल
दो अजनबियों  में मोहोब्बत जगाता है यह दिल
दो लोगो को जोड़े लगता है यह दिल
सवाल या निशान खड़ा करता है यह दिल
जज़्बात नए पैदा करता है यह दिल

मांगने पर कुछ मिल जाता, तो लगता है बहुत बड़ा है यह दिल
मांगने पर कुछ न मिलता तो छोटा सा लगता है यह दिल


जब इतना सब कुछ
जब इतना सब कुछ हो सकता है इस दिल से
तो क्यों दोहरे से मौत करता है यह दिल
क्यों टूथ जाता है यह दिल
क्यों जखम बन जाता है यह दिल
क्यों रुलाता है यह दिल
क्यों किसी की याद दिलाता है यह  दिल !


अभी यह दिल टूटा सा  लगने लगता है
कभी बिखरा नज़र आता है
कभी ओस की तरह बिना बौछार नरम हो जाता है
कभी रुला देता है यह दिल !

Friday, December 26, 2014

काश मेरे लाडले -Poetry on Peshawar attack

काश मेरे लाडले ,तूने पेट दर्द का बहाना किया होता।
तो आज मेरी कोक सुनीकर, तू नहीं गया होता
शायद मेरे बुढ़ापे का सहारा, न छिनता
शायद यह घर, सुना सुना नहीं लागता।

तेरी इतनी दर्दनाक मौत की जिमेदार, शायद में हूँ
क्यूँ जन्म दिया तुझे जहाँ जहाँ मनुष्य रूपी शैतान रहते है
जहाँ हैवान, ईश्वर को मारने का कलेजा रखते है
जहाँ इंसान इंसान का, दुश्मन है
जहाँ की सत्ता ,मानवता से बलवान है
जहाँ का मानव, दनाव से भी ज्यादा दुष्ट है

मुस्लिम हिन्दू सिख ईसाई सब तो तुझे अल्लाह ,भगवान, सत्गुरु ,jesus का रूप मानते है
फिर क्यों, दानव दरिंदो ने आपने खुदा को मर दिया

क्यों तू आज स्कूल छोड़कर, ईमली तोड़ने नहीं गया
क्यों तू आज स्कूल की बस, समय पर पकड़ लिया

बेटा तेरे दर्द को मैंने पुरे विश्व की आँखो में देखा है
तेरे बहते खून को देख पूरी दुनिया की आँखे नम हुई होगी

तू चला तो गया है आपने साथियो के साथ जन्नत में
पर वहा मस्ती मत करना क्योंकि तेरी माँ तुझे वहा बच्चने नहीं आयेगी

 बेटा अफ़सोस न करना आपने जीवन के जाने का,
यहा अभी भी कुछ सियासी लोग तेरे दर्द को सुनकर अनजान बनते है।

बेटा मेरी यादो में हमेशा तू जिन्दा रहेगा ,
और मुझे यकीन है, तू जन्नत में भी मज़्ज़ा कर रहा होगा ।

Saturday, December 13, 2014

मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

यह कविता उस बेकसूर लड़की जो सजा कट रही है किसी ओर के अमानवीय व्यवहार के कारण।

 #RAPE VICTIM

 मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो
 मुझे अब यह समाज से नफरत है
इंसाफ की रुह दहलाने वाली इमारत से नफरत है

मुझे इस पूरी दुनिया से नफरत है
 इसलिए नही की मेरे साथ गलत हुआ
बल्कि इसलिए की अब उसे कुरेदा जा रहा है
मुझे कुछ नही कहना,न बताना अपना दर्द

 मुझे आपने दर्द को स्वयं सेहने दो|
 मत उछालो मेरी आबरू, बिकाऊ दुनिया में
मत दो मुझे हमदर्दी ,मेरा हमदर्द मे ही हूँ

 अब न बोलो मुझे बेच्चरी ,बेसहारा, लाचार
 कोशिश हो साके तो भूल वो घटना
जहा मेरी सिसकियो को सुनकर कुछ लोग चले गए थे

 वो घटना जिसका चलचित्र दूरदर्शन पर दिखते हो
मेरे बदले हुआ नाम से मेरी कहानी सुनाते हो
क्यों जलाने जाते हो मेरे नाम की मोमबतिया
क्यों उस घटना का सहारा लेकर महिलाओ को बाहर जाने से रोकते हो।

 झिझोर जाती है मेरी आत्मा जब दूरदशन पर पापा रो पढ़ते है।
 जब मेरी माँ की चमकती आँखे धुँधली दिखाई देती है
जब गुड़िया स्कूल नही जाती है।
जब मेरे दोस्त मेरे सामने अपना प्रश्नवाचक चेहरा लेकर आते है।

 हो सके तो समाज के आईने को बदलो
 हो सके तो अपनी सोच बदलो
ओर मेरे लिए बस इतना कर दो मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो।

 ~कुश गुप्ता