लगता है ज़िंदगी,थम सी गयी है
हसी पर मायुसी की छाप, दिख रही है
कोशिश करने का मान, नही कर रहा
हारने के बाद रोने का,फायदा नहीं दिख रहा
मेहनत अब यह शरीर, करना नहीं चाहता
हकीकत का सामना करना ,यह दिल नहीं चाहता
दिमाग कहे रहा है ,थक गया हु में
कदम बोल रहे है ,रुक जाना चाहता हु में
अब यह हाथ भी सहारा ले रहे है ,मेरे हुनर का
हार गया हु में ज़िन्दगी से, पर मन है जीने का।। ~Kush Gupta