Kush Ki Poetry
Thursday, February 10, 2011
परिंदों की तरह उड़ने की बाते करने वाले जरूरी नहीं है आपना रास्ता हवा में ही ढूंढे क्योकि उन परिंदों को भी किसी पेड़ की शाखा पर आपना निवास बनना पड़ता हे
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