Tuesday, January 20, 2009

ab kya padee

कुश गुप्ता के अनमोल वचन !!!


रात में, पुस्तक लिए हात में,
पड़ने के प्रयास में, बेठे हे रात में!

सर पर था Xam, टूट रहा था असमान,
आफत में थी मेरी जान,

क्या पडू क्या ने पडू की सोच में !
मौज उदै पुरे साल, अब था मेरा बुरा हाल,

दीमाग पर चढ़ रहा था बुखार,
डूब रहा था मेरा हाल!दिल कहता था बार-बार,

हे प्रभु अब के बार कर दो बीडा पार,
फिर कभी न होगी ऐसी भूल, मान लगा कर पड़ेगा यह कुश गुप्ता साल फार फुल।!!


जय श्री पढाई देवी !!